बचपन की आदतें और खान-पान हमारी पूरी जिंदगी की सेहत पर गहरी छाप छोड़ते हैं, और हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने इस बात पर पुख्ता मुहर लगा दी है कि जीवन के शुरुआती दिनों में चीनी (शुगर) का कम सेवन भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
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| Image - pixabay |
आमतौर पर हम यही सोचते हैं कि गलत खान-पान या अनहेल्दी डाइट का असर हमारे शरीर पर ढलती उम्र में या वयस्क होने पर ही पड़ता है, लेकिन शोधकर्ताओं का यह नया अध्ययन यह बताता है कि गर्भ में पलने के दौरान और जीवन के शुरुआती 1,000 दिनों में मिलने वाला पोषण हमारे पूरे जीवन के स्वास्थ्य की नींव रखता है। वैज्ञानिकों ने इतिहास के एक बड़े उदाहरण का अध्ययन किया, जिसमें ब्रिटेन में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चीनी के राशनिंग (सीमित मात्रा) का दौर शामिल था। जब युद्ध के बाद प्रतिबंध हटे, तो अचानक चीनी की खपत दोगुनी हो गई। शोध में यह देखा गया कि जिन लोगों का जन्म उस सीमित चीनी के दौर में हुआ था और जिन्होंने अपने जीवन के शुरुआती वर्षों में बहुत कम अतिरिक्त चीनी खाई थी, उनमें दशकों बाद वयस्क होने पर कैंसर का जोखिम उन लोगों की तुलना में काफी कम पाया गया जो चीनी की बहुतायत वाले माहौल में पले-बढ़े थे।
इस हैरान करने वाले परिणाम के पीछे एक बहुत महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया काम करती है। हमारे जीवन के शुरुआती चरण में, विशेषकर शैशवावस्था और बाल्यावस्था के शुरुआती वर्षों में, शरीर की कोशिकाएं, प्रतिरक्षा प्रणाली और मेटाबॉलिज्म तेजी से विकसित हो रहे होते हैं। इस नाजुक दौर में यदि बच्चों को अत्यधिक चीनी या मीठी चीजें दी जाती हैं, तो यह उनके शरीर के चयापचय को इस तरह से ढाल देती है कि आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में क्रोनिक सूजन (chronic inflammation) जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। चिकित्सा विज्ञान इस बात को अच्छी तरह समझता है कि मोटापा और बिगड़ा हुआ मेटाबॉलिज्म कई तरह के कैंसर के विकास के लिए सीधा रास्ता तैयार करते हैं। शुरुआती जीवन में चीनी पर नियंत्रण रखने से शरीर का मेटाबॉलिक सिस्टम बहुत स्वस्थ रहता है, जिससे भविष्य में ट्यूमर और कैंसर कोशिकाओं को पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिल पातीं।
आज के समय में यह अध्ययन हर माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है। आज के दौर में बच्चों के बाजार में मिलने वाले स्नैक्स, पैकेज्ड फूड्स, जूस और ड्रिंक्स में 'हिडन शुगर' यानी छिपी हुई चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिसे बच्चे अनजाने में बहुत कम उम्र से ही कंज्यूम करने लगते हैं। यह शोध हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चों की शुरुआती डाइट में चीनी को सीमित करना केवल उनके बचपन के दांतों की सड़न या मोटापे से बचाने भर के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह उनके आने वाले दशकों की लंबी, सुरक्षित और स्वस्थ जिंदगी की गारंटी तैयार करता है। यह इस बात का प्रमाण है कि छोटी उम्र में की गई एक छोटी सी सतर्कता हमारे भविष्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य संकटों को हमसे कोसों दूर रख सकती है।
